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हरियाणा सरकार

इस राज्य सरकार ने सरसों की खेती करने वाले किसानों के हित में उठाया महत्वपूर्ण कदम

इस राज्य सरकार ने सरसों की खेती करने वाले किसानों के हित में उठाया महत्वपूर्ण कदम

सरसों की खेती करने वाले हरियाणा के किसानों के लिए एक खुशखबरी है। राज्य के मुख्य सचिव संजीव कौशल का कहना है, कि रबी सीजन के दौरान सरकार किसानों की सरसों, चना, सूरजमुखी व समर मूंग की निर्धारित एमएसपी पर खरीद करेगी। साथ ही, मार्च से 5 जनपदों में उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से सूरजमुखी तेल की आपूर्ति की जाएगी।

मुख्य सचिव ने फसलों के उत्पादन को लेकर क्या कहा है ?

एक बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि इस सीजन में 50 हजार 800 मीट्रिक टन सूरजमुखी, 14 लाख 14 हजार 710 मीट्रिक टन सरसों, 26 हजार 320 मीट्रिक टन चना और 33 हजार 600 मीट्रिक टन समर मूंग की पैदावार होने की उम्मीद है। मुख्य सचिव ने बताया कि हरियाणा राज्य वेयरहाउसिंग कारपोरेशन, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग व हैफेड मंडियों में सरसों, समर मूंग, चना और सूरजमुखी की खरीद प्रारंभ करने के लिए तैयारियां शुरू करने के आदेश भी दिए हैं।

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सरकार कब से सरसों की खरीद चालू करेगी 

सरकार मार्च के अंतिम सप्ताह में 5 हजार 650 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से सरसों की खरीद चालू करेगी। इसी प्रकार 5 हजार 440 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से किसानों का चना खरीदा जाएगा। 15 मई से 8 हजार 558 रुपये प्रति क्विंटल की दर से समर मूंग की खरीद होगी। इसी प्रकार एक से 15 जून तक 6760 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से सूरजमुखी की खरीद होगी।

लापहरवाही करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा 

मुख्य सचिव ने खरीद प्रक्रिया के दौरान किसानों की सुविधा के लिए अधिकारियों को समस्त आवश्यक प्रबंध करने एवं खरीदी गई पैदावार का तीन दिन के अंदर भुगतान करने के लिए कहा है। साथ ही, उन्होंने कहा कि काम में लापरवाही करने वालों को बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा। इस फैसले से किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य भी मिल जाएगा।

गौशालाओं से होगी अच्छी कमाई, हरियाणा सरकार ने योजना बनाई

गौशालाओं से होगी अच्छी कमाई, हरियाणा सरकार ने योजना बनाई

हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने जनपद फतेहाबाद में स्थित स्वामी सदानंद प्रणामी गौ सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट(Swami Sadanand Parnami Charitable Trust) के वार्षिक उत्सव में संबोधन के उपरांत "अपना घर" में रहने वाले दीनहीन बेसहारा लोगों से उनका दुःख दर्द एवं हाल चाल जाना। साथ ही गौ नस्ल की बेहतरी के वैज्ञानिक तरीकों को प्रचलन में लाने का आग्रह किया।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि गौशालाओं में गौवंश के संरक्षण एवं उसके मूत्र व गोबर से उत्पाद निर्मित करने की अत्यंत आवश्यकता है, जिससे गौशालाएं किसी पर निर्भर न रहें। इसी सन्दर्भ में उपमुख्यमंत्री द्वारा लाडवा की गौशाला का जिक्र करते हुए कहा है, कि वहां गोबर एवं मूत्र के प्रयोग से विभिन्न प्रकार के उत्पाद निर्मित किये जा रहे हैं, जो गौशालाओं की आय का स्त्रोत बन रहे हैं। इसी के मध्य चौटाला ने कहा कि गाय के गोबर से पेंट भी बनाया जा सकता है, जिसका पिंजौरा की एक गौशाला उत्तम उदाहरण है।

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हरियाणा राज्य के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बताया कि समस्त सरकारी संस्थानों में गाय के गोबर से निर्मित पेंट का इस्तेमाल हो, इसके लिए वह हर संभव कोशिश करेंगे। उनकी इस पहल से और भी गौशालाओं को प्रोत्साहन मिलेगा, साथ साथ इसी तरह से गौशालाओं में बायोगैस प्लांट स्थापित कर रसोई गैस बनाई जा सकती है जो आय का प्रमुख स्त्रोत भी बन सकता है, बायोगैस प्लांट स्थापित करने के लिए हरियाणा सरकार सहयोग करेगी।

चौटाला ने की सोलर प्लांट लगवाने की घोषणा

हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने जनपद फतेहाबाद में स्तिथ स्वामी सदानंद प्रणामी गौ सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के वार्षिक उत्सव में संबोधन के उपरांत "अपना घर" में रहने वाले दीनहीन बेसहारा लोगों से उनका दुःख दर्द एवं हाल चाल जाना। आश्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आये दुष्यंत चौटाला ने रक्तदान शिविर में खुद रक्तदान किया एवं गौसेवा के साथ ही फतेहाबाद के स्वामी सदानंद गौ सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट आश्रम में स्वयं कोष से सोलर प्लांट लगवाने का एलान किया। गौवंश को अच्छे तरीके से रखने के लिए राज्य सरकार सम्पूर्ण प्रयास करेगी।

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दीनहीन लोगों की सहायता कर सराहनीय कार्य किया जा रहा है।

वार्षिक उत्सव के दौरान हरियाणा उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा है, कि संस्थान स्थापित करना बेहद सरल है जबकि, संस्थान को बेहतर तरीके से निरंतर चलाना बेहद कठिन है। श्रीकृष्ण प्रणामी आश्रम गौशाला के साथ-साथ ''अपना घर'' के माध्यम से दीनहीन व असहाय प्राणियों की सेवा की जा रही है। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण हेतु गौशाला निर्माण व वैज्ञानिक तरीकों से गायों की नस्ल बेहतरी के साथ दुग्ध उत्पादन में वृद्धि की अत्यंत आवश्यकता है। दुष्यंत चौटाला ने बताया, कि लगभग 40 वर्ष पूर्व गीर नस्ल के गौवंश को भारत से ही ब्राजिल ले जाया गया था। गीर नस्ल जो अब ब्राजील में ७० से ७२ लीटर तक रोजाना दूध देती हैं, एवं उन लोगों के आय का मुख्य स्त्रोत भी बनी है।

हरियाणा राज्य में कृषि सम्बंधित उपकरणों पर मिल रहा ८० % सब्सिडी, समय से करलें आवेदन

हरियाणा राज्य में कृषि सम्बंधित उपकरणों पर मिल रहा ८० % सब्सिडी, समय से करलें आवेदन

आजकल कृषि जगत में कृषि उपकरणों की अहम भूमिका है, आधुनिक कृषि यंत्रों से किसान की मेहनत के साथ साथ उनकी लागत में भी बेहद कमी आयी है। पहले किसान काफी परिश्रम करके फसल को उगाते थे। लेकिन आधुनिक विज्ञान की सहायता से नवीन कृषि उपकरणों की खोज हो रही है, जिससे किसानों के लिए उपयोगी कृषि यंत्रों की उपलब्धता तीव्रता से बढ़ी है। सरकार उपरोक्त सभी बातों को ध्यान में रखते हुए कृषि सम्बंधित उपकरणों पर अनुदान देने की योजना लाती रहती है। इसी सन्दर्भ में फ़िलहाल हरियाणा सरकार किसानों के लिए ८० प्रतिशत तक का अनुदान देने का आह्वान कर चुकी है, जिसमें विभिन्न प्रकार की मशीनें जैसे कि बुवाई, छिड़काव और कटाई से सम्बंधित उपकरण भी शामिल हैं।

हरियाणा सरकार ८० प्रतिशत तक क्यों दे रही है कृषि यंत्रों पर अनुदान ?

किसानों की आर्थिक हालत को देखते हुए सरकार ये भली भांति जानती है कि बहुतायत किसान आधुनिक उपकरणों को खरीदने के लिए सक्षम नहीं है। लेकिन पैदावार में वृद्धि और किसान की लागत में कमी के लिए आधुनिक कृषि उपकरणों की अत्यंत आवश्यकता है। सरकार किसानों की समस्या को समझते हुए उनके लिए ८० प्रतिशत अनुदान प्रदान करने की इस मुहिम से, किसानों को आर्थिक तंगी से निजात दिलाना चाहती है। साथ ही हरियाणा राज्य को काफी उन्नत राज्य बनाने की राह पर चलना शुरू कर रही है, क्योंकि हरियाणा राज्य में अधिकतर लोग कृषि आश्रित होते हैं, इसलिए कृषि जगत को अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी भी बोला जाता है। किसान की उन्नति से ही राज्य और देश की उन्नती का मार्ग जाता है। [embed]https://www.youtube.com/watch?v=LH7w59jnW-M[/embed]

कौन कौन से कृषि उपकरणों पर मिल रहा है अनुदान ?

हरियाणा राज्य सरकार द्वारा इन कृषि उपकरणों पर मिल रहा है अनुदान जिसमें, रोटावेटर, हे रेक मशीन, मोबाइल श्रेडर, रिप्पर बाइंडर, स्ट्रॉ बेलर, फ़र्टिलाइज़र ब्रॉडकास्टर, ट्रैक्टर ड्राइविंग पाउडर वीडर, लेसर लैंड लेवलर समेत ११ कृषि उपकरण सम्मिलित हैं। हरियाणा सरकार ने राज्य के किसानों के लिए कृषि विभाग के माध्यम से वेबसाइट https://agriharyana.gov.in/ पर जानकारी उपलब्ध कराई है, जहाँ किसान भाई आवेदन कर सकते हैं और इसके लिए कृषि केंद्र की सहायता भी ले सकते हैं।

पूर्व में भी पराली के अवशेष से निजात के लिए उपकरण अनुदान देने के लिए मांगे थे आवेदन

हरियाणा राज्य सरकार ने पराली से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिए जरूरी कृषि उपकरणों पर अनुदान देने की घोषणा की और आवेदन करने के लिए बोला था, जिससे पराली के अवशेष को नष्ट किया जा सके और दिल्ली समेत अन्य शहरों को भी प्रदुषण की मार से बचाया जा सके।
भूजल स्तर में गिरावट को देखते हुए इस राज्य में 1000 रिचार्जिंग बोरवेल का निर्माण किया जाएगा

भूजल स्तर में गिरावट को देखते हुए इस राज्य में 1000 रिचार्जिंग बोरवेल का निर्माण किया जाएगा

भारत के विभिन्न राज्यों से भूजल स्तर में गिरावट आने की खबर सामने आ रही है। फलस्वरूप फसल की पैदावार पर इसका दुष्प्रभाव पड़ रहा है। इस समस्या का निराकरण करने के लिए हरियाणा सरकार द्वारा प्रथम चरण में 1000 रीचार्जिंग बोरवेल की स्थापना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। कृषि क्षेत्र में जल के प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिसके तहत विभिन्न राज्यों में ड्रॉप मोर क्रॉप योजना जारी की जा रही है। आपकी जानकारी के लिए बतादें कि न्यूनतम जल में सिंचाई करके नकदी एवं बागवानी फसलों से काफी अधिक पैदावार मिल रही है। भारत के बहुत सारे क्षेत्रों में भूमिगत जल संकट भी एक बड़ी चुनौती थी। हालाँकि, फिलहाल सूक्ष्म सिंचाई मॉडल द्वारा इन समस्त समस्याओं को दूर कर दिया है। यह सिंचाई पद्धति को उपयोग में लाना किसान भाइयों के लिए और भी सस्ता हो गया है। केंद्र सरकार के माध्यम से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के चलते सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली स्थापित कराने के लिए किसान भाइयों को सब्सिडी का प्रावधान दिया गया है।

हरियाणा सरकार द्वारा दिया जा रहा है अनुदान

इसी कड़ी में अब हरियाणा सरकार ने भी ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति को बढ़ावा देने और रिचार्जिंग बोरवेल मुहैय्या कराने हेतु किसान भाइयों को सब्सिड़ी दी जा रही है। इस संबंध में सरकार का यह कहना है, कि हमारे इस प्रयास से जल संरक्षण एवं इसका संचयन करने में विशेष सहायता मदद प्राप्त होगी। साथ ही, यह घटते भूमिगत जल स्तर के संकट को भी दूर करने में सहायता करेगा।

किसानों को सूक्ष्म सिंचाई हेतु 85% अनुदान का प्रावधान

कृषि क्षेत्र में सिंचाई हेतु सर्वाधिक निर्भरता भूमिगत जल पर ही रहती है। जल की उपलब्धता को निरंतर स्थिर बनाए रखने के लिए जल की अधिक खपत वाली फसलों को हतोत्साहित किया जा रहा है। इसकी अपेक्षा बागवानी फसलों की कृषि को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही, सूक्ष्म सिंचाई मॉडल को प्रचलन में लाने के लिए किसानों को रीचार्जिंग बोरवेल पर सब्सिड़ी दी जा रही है। हिसार में आयोजित कृषि विकास मेले में हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कहा है, कि वर्तमान हालात को ध्यान में रखते हुए हमें जल की खपत को कम करने की आवश्यकता है। इसके लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को उपयोग में लाना होगा। क्योंकि यह किसानों के लिए सस्ता और सुविधाजनक होता है। साथ ही, राज्य सरकार सूक्ष्म सिंचाई को उपयोग में लाने के लिए किसान भाइयों को 85% अनुदान भी प्रदान कर रही है। ये भी देखें: सिंचाई की नहीं होगी समस्या, सरकार की इस पहल से किसानों की मुश्किल होगी आसान

1,000 रीचार्जिंग बोरवेल लगाने का लक्ष्य तय किया गया है

भारत में फिलहाल भूजल स्तर में आ रही गिरावट को पुनः ठीक करने के लिए वर्षा जल संचयन को भी प्रोत्साहन मिल रहा है। इसी संबंध में राज्य सरकार रीचार्जिंग बोरवेल के निर्माण की योजना बना रही हैं, जिसके माध्यम से वर्षा के जल को पुनः भूमि के अंदर पहुंचाया जा सके। इस कार्य हेतु किसान भाइयों को 25,000 रुपये खर्च करने पड़ेंगे। इसके अतिरिक्त जो भी खर्चा होगा उसको हरियाणा सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

इस तरह किसान आवेदन कर सकते हैं

हरियाणा सरकार द्वारा रीचार्जिंग बोरवेल पर आवेदन की प्रक्रिया को ऑनलाइन माध्यम से भी कर दिया गया है। अगर आप भी हरियाणा राज्य के किसान हैं और स्वयं के खेत में जल संचयन हेतु बोरवेल स्थापित कराना चाहते हैं, तब आप सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, हरियाणा की वेबसाइट hid.gov.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसके बारे में विस्तृत रूप से जानकारी प्राप्त करने के लिए स्वयं के जनपद के कृषि विभाग के कार्यालय में भी संपर्क कर फायदा उठा सकते हैं।
यह राज्य सरकार पानी बचाने के लिए दे रही है पैसा, 85 प्रतिशत तक मिल सकती है सब्सिडी

यह राज्य सरकार पानी बचाने के लिए दे रही है पैसा, 85 प्रतिशत तक मिल सकती है सब्सिडी

ग्लोबल वार्मिंग और भूमिगत जल के अत्याधिक दोहन के कारण धरती का भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, ऐसे में लोगों के साथ ही किसानों के सामने भी भविष्य में बड़ी परेशानी सामने आ सकती है। जहां लोगों के लिए पेयजल एवं किसानों के लिए सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता में कमी आ सकती है। क्योंकि इन दिनों खेती किसानी में पानी का बहुतायत में उपयोग किया जा रहा है। खेती किसानी में अब नए यंत्रों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है जो पानी की बेतहासा बर्बादी करते हैं। खेतों में पानी की सिंचाई करके किसान भाई अच्छी खासा उत्पादन करते हैं जिनसे उन्हें मुनाफा होता है। लेकिन भूमिगत जल के कम होने की समस्या बेहद विकराल रूप ले चुकी है। गिरते हुए भूमिगत जल को देखते हुए अब सरकार ने दूसरी सिंचाई पद्धतियों को अपनाना शुरू कर दिया है जिससे पानी की खपत को कम किया जा सके। इसमें ड्रिप सिंचाई एक बेहतरीन तकनीक है जिससे किसान भाई भारी मात्रा में पानी की बचत कर सकते हैं। इसके साथ ही सूक्ष्म सिंचाई मॉडल ने भी कम होते पानी की चिंता को दूर किया है। इसके लिए सरकार किसानों को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई सिस्टम लगवाने के लिए सब्सिडी प्रदान कर रही है। इसी को देखते हुए अब हरियाणा की सरकार भी आगे आई है और हरियाणा की सरकार ने कहा है कि ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति अपनाने और रिचार्जिंग बोरवेल इंस्टॉल करवाने वाले किसानों को सब्सिडी प्रदान की जाएगी। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इससे क्षय होते भूमिगत जल को रोका जा सकता है साथ ही पानी के संचयन में विशेष मदद मिलने वाली है। इससे भूमिगत जल को तेजी से रिकवर किया जा सकता है।

किसानों को इतनी मिल सकती है सब्सिडी

इन दिनों अगर सिंचाई की बात करें तो भूमि के एक बहुत बड़े हिस्से की सिंचाई भूमिगत जल के द्वारा की जाती है। जिसके कारण भूमिगत जल का लगातार इस्तेमाल किया जा रहा है। जो पर्यावरण में नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। हालांकि इससे बागवानी फसलों को प्रोत्साहन मिल रहा है लेकिन इससे फायदे होने की जगह नुकसान ज्यादा हैं। इसको देखते हुए अब हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने घोषणा की है कि सूक्ष्म सिंचाई मॉडल अपनाने के लिए अब किसानों को 85% तक की सब्सिडी दी जाएगी। इस मॉडल में किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को अपनाना होगा। ये किसानों के लिए बेहद सस्ता और सुविधाजनक भी है। ये भी देखें: 75 फीसद सब्सिडी के साथ मिल रहा ड्रिप स्प्रिंकलर सिस्टम, किसानों को करना होगा बस ये काम

पहले चरण में इतने लोगों को दी जाएगी सब्सिडी

सरकार ने बताया है कि सूक्ष्म सिंचाई मॉडल के अंतर्गत गिरते भूजल स्तर को वापस रिकवर करने के लिए सरकार रीचार्जिंग बोरवेल लगाने की योजना पर काम कर रही है। जिससे बरसात के पानी का संचयन करके उसे वापस जमीन में पहुंचाया जा सके। सरकार ने बताया है कि रीचार्जिंग बोरवेल लगाने के लिए किसान को मात्र 25 हजार रुपये खर्च करने होंगे। इसके बाद जो भी खर्च आता है वो हरियाणा की सरकार वहन करेगी। पहले चरण में राज्य में सरकार ने 1 हजार रीचार्जिंग बोरवेल लगाने का लक्ष्य रखा है।

सब्सिडी प्राप्त करने के लिए इस प्रकार करें आवेदन

हरियाणा सरकार की ओर से कहा गया है कि अब आवेदन करने के लिए किसान भाइयों को किसी भी प्रकार से परेशान होने की जरूरत नहीं है। इस पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है। इसके लिए इच्छुक किसान भाई हरियाणा सरकार के सिंचाई और जल संसाधन विभाग की वेबसाइट hid.gov.in पर जाकर बेहद आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा किसान भाई अधिक जानकारी के लिए अपने जिले के कृषि विभाग में भी संपर्क कर सकते हैं और इस योजना का लाभ ले सकते हैं।
बेमौसम बरसात तथा ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसल पर किसानों को मिलेगा 15,000 रुपये का मुआवजा

बेमौसम बरसात तथा ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसल पर किसानों को मिलेगा 15,000 रुपये का मुआवजा

इस साल देश में मार्च के महीने में जमकर बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि हुई है। जिसके कारण किसानों का जमकर नुकसान हुआ है। फसलें खेतों में बिछ गई थीं और बहुत सारी फसलें सड़कर खराब हो गई थीं। इसको देखते हुए अब हरियाणा की सरकार किसानों को मुआवजा देने जा रही है। हरियाणा की सरकार ने दोबारा ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोल दिया है ताकि जिन भी किसानों की फसलों का नुकसान हुआ है वो फिर से मुआवजे की मांग कर सकें। इसके साथ ही राज्य सरकार ने राज्य के अलग-अलग इलाकों में फसल नुकसान के आंकलन के लिए विशेष गिरदावरी के आदेश जारी किए हैं। साथ ही सरकार ने किसानों को मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाने को कहा है। हरियाणा के कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि किसानों को हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए एक पारदर्शी प्रणाली तैयार की गई है। जिसके आधार पर नुकसान के आकलन और सत्यापन के बाद किसानों राहत प्रदान की जाएगी। गिरदावरी रिपोर्ट आने के बाद मई के महीने के अंत तक किसानों को हुए नुकसान की भरपाई कर दी जाएगी। ये भी पढ़े: तेज बारिश और ओलों ने गेहूं की पूरी फसल को यहां कर दिया है बर्बाद, किसान कर रहे हैं मुआवजे की मांग अधिकारियों ने बताया है कि जिन किसानों की फसलों का बीमा नहीं था, उन किसानों की फसलों का 75 फीसदी नुकसान होने पर प्रति एकड़ 15 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। इसके साथ ही जिन फसलों को 50 से 75 फीसदी तक नुकसान हुआ है उनको 12 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जाएगा। साथ ही जिन किसानों की फसलों का बीमा है उनके नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी करेगी। इसके लिए किसान को नुकसान की जानकारी बीमा कंपनी को मुहैया करवानी होगी। फसल कटाई एक बाद खेत में सुखाने के लिए रखी हुई फसल का भी नुकसान होता है तो उसकी भरपाई भी बीमा कंपनी करेगी।
हरियाणा सरकार भूमिगत जल स्तर में गिरावट को लेकर सतर्क, अनुदान भी दिया जा रहा है

हरियाणा सरकार भूमिगत जल स्तर में गिरावट को लेकर सतर्क, अनुदान भी दिया जा रहा है

हरियाणा राज्य में गेहूं के उपरांत सर्वाधिक धान का उत्पादन किया जाता है। परंतु, किसान भाई भी धान की सिंचाई भी ट्यूबवेल के माध्यम से करती है। संपूर्ण भारत में भूमिगत जल का स्तर काफी तीव्रता से नीचे जा रहा है। इससे आने वाले समय में जल संकट मड़रा सकता है। विशेष बात यह है, कि भूमिगत जल का सर्वाधिक दोहन फसलों की सिंचाई में किया जा रहा है। इनमे भी सबसे अधिक भूमिगत जल का उपयोग धान की खेती में किया जाता है। यही कारण है, कि हरियाणा की तरह धान उत्पाद प्रदेश में भूमिगत जल स्तर में तीव्रता से गिरावट देखी जा रही है। हालांकि, इसको लेकर सरकार काफी सतर्कता बरत रही है। आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में गेहूं के उपरांत सर्वाधिक धान का उत्पादन किया जाता है। परंतु, किसान धान की सिंचाई करने के लिए भी ट्यूबवेल का ही उपयोग करते हैं। इस तरह एक हेक्टेयर में धान का उत्पादन करने पर 50 लाख लीटर जल की खपत हो जाती है। हरियाणा में 33 लाख एकड़ से ज्यादा के क्षेत्रफल में धान की बुवाई की जाती है। ऐसी स्थिति में बाकी राज्यों की भांति हरियाणा में भी भूमिगत जल स्तर बेहद तीव्रता से नीचे गिरता जा रहा है। परंतु, हरियाणा सरकार द्वारा इस संकट से निपटने के लिए एक नया फॉर्मूला समाधान के तौर पर ढूंढ लिया गया है।

हरियाणा सरकार अनुदान बतौर देगी 7 हजार रुपए

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सरकार द्वारा भूमिगत जल स्तर को सुरक्षित करने हेतु ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना जारी की गई है। इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकार धान के स्थान पर अन्य फसलों का उत्पादन करने के लिए किसानों को प्रेरित और प्रोत्साहित कर रही है। इससे भूमिगत जल स्तर को संरक्षित किया जा सके। विशेष बात यह है, कि धान के स्थान पर बाकी फसलों की खेती-किसानी करने वाले कृषकों को सरकार 7 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से अनुदान भी प्रदान कर रही है। यह भी पढ़ें: भूजल स्तर में गिरावट को देखते हुए इस राज्य में 1000 रिचार्जिंग बोरवेल का निर्माण किया जाएगा दरअसल, हरियाणा सरकार का कहना है, कि धान की खेती में अत्यधिक जल की आवश्यकता होने की वजह से जल का दोहन भी अधिक होता है। इसके स्थान पर मक्का, तिलहन, हरी सब्जी और दाल की खेती कर जल की खपत कम की जा सकती है। क्योंकि इन फसलों की खेती में बेहद न्यूनतम पानी की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त डीएसआर तकनीक द्वारा धान की खेती करने पर 4000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से अनुदान प्रदान किया जाएगा।

हरियाणा सरकार ड्रिप इरिगेशन पर कितना अनुदान दे रही है

हरियाणा सरकार सतर्कता से जल संरक्षण हेतु विभिन्न प्रकार की योजनाएं चला रही है। सरकार की तरफ से ड्रिप इरिगेशन पर भी 80 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इस विधि द्वारा फसलों की सिंचाई करने पर जल की बर्बादी बेहद कम होती है, क्योंकि बुंद-बुंद कर के पानी फसलों की जड़ों तक पहुंचता है। यदि किसान भाई बाकी फसलों का उत्पादन करते हैं, तब वह सरकारी अनुदान का फायदा प्राप्त कर सकते हैं।
इस राज्य में बागवानी फसलों को प्रोत्साहन देने के लिए अनुदान दिया जा रहा है

इस राज्य में बागवानी फसलों को प्रोत्साहन देने के लिए अनुदान दिया जा रहा है

हरियाणा सरकार अपने स्तर से किसानों को लुभाने के लिए दिनों-दिन किसी नई सब्सिडी का ऐलान कर रही है। वर्तमान में फल व सब्जी की खेती पर किसानों को बड़ी सब्सिड़ी मिलेगी। बतादें, कि एक ओर हरियाणा में सूरजमुखी को भावांतर भरपाई योजना से बाहर निकालने की मांग को लेकर सड़कों पर आंदोलन जारी है। तो उधर, दूसरी ओर सरकार अन्नदाताओं को अपनी सब्सिडी के जरिए लुभाने का भरपूर प्रयास कर रही है। विरोध प्रदर्शन के मध्य किसानों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। दरअसल, हरियाणा राज्य सरकार ने फल व सब्जी की खेती पर अच्छा-खासा अनुदान देने की घोषणा करदी है। चलिए जानते हैं, कि किसानों को कहां और कितना अनुदान मिलेगा।

बागवानी फसलों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है

हरियाणा में किसान भावांतर योजना से सूरजमुखी को बाहर निकालने के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में हरियाणा सरकार ने किसानों को अनुदान देने का ऐलान किया है। इसका अर्थ है, कि हरियाणा सरकार किसानों को फल व सब्जी की खेती पर अच्छा-खासा अनुदान प्रदान कर रही है। दरअसल, बागवानी को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से इस तरह का ऐलान किया गया है। बतादें, कि हरियाणा में जल का काफी अभाव है। जिसके चलते किसानों को प्रतिवर्ष धान-गेहूं की खेती में काफी बड़ी हानि वहन करनी पड़ती है। अब ऐसी स्थिति में सरकार ऐसी फसलों को प्रोत्साहन दे रही है, जिसमें जल की कम खपत है। हरियाणा सरकार विगत दिनों से कई सारी महत्वपूर्ण योजनाओं के तहत किसानों को हर संभव अनुदान प्रदान करने में जुटी हुई है।

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हरियाणा सरकार कितना अनुदान प्रदान कर रही है

हरियाणा सरकार में बागवानी विभाग की तरफ से 'मेरा पानी मेरी विरासत' नाम से एक योजना चलाई जा रही है। इसके अंतर्गत कृषकों को कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जो किसान भाई ऐसा कर रहे हैं, उनको प्रोत्साहन धनराशि भी प्रदान की जा रही है। हरियाणा सरकार प्रदेश के किसानों में पॉलीहाउस की स्थापना करने के लिए 65 प्रतिशत अनुदान प्रदान कर रही है। इस पोली हाउस के अंतर्गत कम खाद और कम पानी के साथ किसी भी फल व सब्जियों की बड़े पैमान पर पैदावार की जा सकती है। पॉलीहाउस की यह भी विशेषता है, कि इसमें किसी भी मौसम में कोई भी सब्जी उत्पादित की जा सकती है। इस अनुदान का फायदा उठाने के लिए किसान भाई अपने समीपवर्ती बागवानी विभाग केंद्र से संपर्क साधें।
मध्य प्रदेश सरकार ने पशुपालन ऋण योजना जारी कर युवाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रदान किए

मध्य प्रदेश सरकार ने पशुपालन ऋण योजना जारी कर युवाओं के लिए रोजगार के अवसर प्रदान किए

मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैय्या कराने के लिए पशुपालन ऋण योजना लेकर आई है। इसके जरिए से राज्य की आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी। मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में बेरोजगारी की दिक्कत को कम करने के लिए इस योजना को जारी किया है। इससे राज्य में बेरोजगारी को तो कम किया ही जा सकता है। साथ ही, लोगों को पशुपालन के लिए प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। सरकार इस पशुपालन ऋण योजना के जरिए युवाओं को पशुओं का पालन आरंभ करने के लिए कर्ज भी उपलब्ध करा रही है। मध्य प्रदेश सरकार ने बताया है, कि प्रदेश में निरंतर बढ़ रही बेरोजगारी की परेशानियों को कम करने के लिए सरकार इस योजना को लेकर आई है। इस योजना का प्रमुख केंद्र बिंदु राज्य के युवा हैं।

पशुपालन ऋण योजना के बारे में जानें

यदि आपके समीप पांच से ज्यादा की संख्या में पशु हैं, तो आप इस पशुपालन ऋण योजना 2023 का फायदा उठा सकते हैं। इस योजना में आवेदन करने वाले को सरकार की तरफ से दस लाख रुपये तक का कर्ज प्रदान किया जाएगा। इस कर्ज की राशि को आवेदन करने वालों के बैंक खाते में सीधा भेजा जाएगा। आप इस धनराशि का इस्तेमाल स्वयं के पशुपालन का व्यवसाय चालू कर सकते हैं।

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योजना का प्रमुख उद्देश्य

मध्य प्रदेश सरकार की इस ऋण योजना के लक्ष्य के माध्यम से मध्य प्रदेश सरकार राज्य के नागरिकों को रोजगार उपलब्ध कराना चाहती है। यह प्रदेश के उन नागरिकों को पशुपालन का रोजगार चालू करने के लिए बैंक से ऋण भी प्रदान करेगा। इसकी सहायता से लोग भैंस पालन, गाय पालन एवं बकरी पालन आदि का काम कर सकेगें। इसके लिए आप आवेदन करने के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.mpdah.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

योजना के प्रमुख तथ्य

इस पशुपालन ऋण योजना के लिए आवेदन समस्त वर्ग के लोग कर सकते हैं। साथ ही, इसका फायदा केवल उन लोगों को दिया जाएगा, जिनके पास पांच या पांच से अधिक पशु उपलब्ध हों। इस योजना के जरिए लोगों को पशुपालन रोजगार आरंभ करने के लिए दस लाख रुपए तक का कर्जा दिया जाएगा। इस ऋण पर बैंक द्वारा 5% का ब्याज भी वसूला जाएगा।
हरियाणा सरकार ने 14 फसलों पर MSP से खरीद शुरू की है

हरियाणा सरकार ने 14 फसलों पर MSP से खरीद शुरू की है

हरियाणा सरकार की तरफ से गेहूं एवं धान के साथ-साथ सरकार 367 मंडियों के जरिए मूंग, तिलहन, बाजरा और अन्य खाद्यान्नों की भी खरीद कर रही है। हरियाणा के अंदर वर्तमान मे मक्का, बाजरा, कपास, सूरजमुखी, मूंग, मूंगफली, अरहर, उड़द, तिल, गेहूं, सरसों, जौ, चना और धान की खरीद एमएसपी पर की जा रही है। हरियाणा न्यूनतम समर्थन मूल्य ( एमएसपी ) पर 14 फसलें खरीदने वाला भारत का प्रथम राज्य बन चुका है। हरियाणा सरकार की तरफ से 14 खाद्यान्न फसलों को इस बार एमएसपी मूल्य पर खरीदा गया है। राज्य सरकार की तरफ से गेहूं एवं धान समेत सरकार 367 मंडियों के जरिए मूँग, तिलहन, बाजरा और बाकी खाद्यान्नों की भी खरीद कर रही है। वर्तमान में हरियाणा राज्य के अंदर मक्का, बाजरा, कपास, सूरजमुखी, मूंग, मूंगफली, अरहर, उड़द और तिल की खरीद एमएसपी पर हो रही है। आपको जानकारी के लिए बतादें, कि अधिकांश राज्य गेहूं, धान, कपास एवं गन्ना जैसी कुछ लोकप्रिय फसलों को एमएसपी पर खरीदते हैं। परंतु, हरियाणा भारत का प्रथम ऐसा राज्य है, जिसने 14 फसलों को MSP के भाव पर खरीदा है।

फसल क्षतिग्रस्त होने पर मुआवजा मिलेगा

खट्टर सरकार द्वारा किसानों की चौपट हुई फसलों को लगाकर मुआवजा देने की बात भी कही थी, जो सीधे किसानों के खातों में पहुंचाई जाऐगी। राज्य सरकार ने अत्यधिक बारिश की वजह किसानों की क्षतिग्रस्त हुई फसलों के लिए यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा, राज्य सरकार फसल नुकसान का आकलन कर रही है। इस आकलन के उपरांत सरकार किसानों की क्षतिग्रस्त हुई फसलों के लिए मुआवजे की धनराशि को उनके खाते में हस्तांतरित करेगी।

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हरियाणा सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति को बेहतर कर रही है

हरियाणा सरकार किसानों को आर्थिक एवं सामाजिक तौर पर सक्षम बनाने की हर संभव कोशिश की जा रही है। इस दिशा में राज्य सरकार की तरफ से विभिन्न योजनाओं का भी संचालन किया जा रहा है। इनमें कुछ प्रमुख योजनाओं में किसान क्रेडिट कार्ड योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, डेयरी उद्यमिता विकास योजना (डीईडीएस), किसान ट्रैक्टर योजना, किसान मित्र योजना, कृषि उड़ान योजना, पशु किसान क्रेडिट कार्ड योजना आदि शम्मिलित हैं। बतादें, कि इन योजनाओं के जरिए अनुदान से लेकर अन्य विभिन्न प्रकार के लाभ मिल रहे हैं।

मेरी फसल-मेरा ब्योरा योजना से कृषकों को लाभ

राज्य सरकार की तरफ से इस योजना को 5 जुलाई 2019 में जारी किया गया था। इस योजना की मदद से कृषक अपनी फसल का पूरा ब्योरा इस पोर्टल पर अपलोड कर सकते हैं। वहीं, इसके साथ-साथ अपनी फसलों को लेकर होने वाली किसी भी तरह की बर्बादी आदि का विवरण भी इस पोर्टल में दे सकते हैं।
कृषि यंत्रों की खरीदी पर सरकार देगी 50% से 80% अनुदान, जानें इसकी आवेदन प्रक्रिया के बारे में

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सरकार समय समय पर किसानों के लिए नयी योजना लेकर आती रहती है। किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में सरकार निरंतर प्रयाश कर रही है। अब हरियाणा सरकार प्रदेश के किसानों के लिए नई योजना लेकर आयी है। हरियाणा सरकार ने राज्य के किसानों को कृषि उपकरण खरीदने पर व्यक्तिगत श्रेणी में 50% अनुदान देने की घोषणा की है, जबकि सहकारी समिति एफपीओ और पंचायतों ने किसानों के लिए कस्टम हायरिंग केंद्र बनाने पर 80% अनुदान दिया है। इस योजना को सरकार ने खेती में आधुनिक उपकरणों का उपयोग करने के लिए शुरू किया है। किसानों को इस योजना का लाभ मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी, क्योंकि वे नवीनतम उपकरणों को आसानी से खरीद सकेंगे। आज यहां आप इस योजना से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी के बारे में विस्तार से जानेंगे

हरियाणा कृषि यंत्र अनुदान योजना के लाभ एवं विशेषताएं

सरकार हरियाणा राज्य के किसानों को इस योजना के तहत कृषि उपकरण खरीदने पर सब्सिडी देगी। इस योजना के अंतर्गत किसानों को 50 प्रतिशत से 80 प्रतिशत की अनुदान राशि मिलेगी। किसानों को आधुनिक कृषि उपकरणों से लाभ मिलेगा। राज्य के किसानों की आर्थिक हालत भी सुधरेगी। राज्य के किसानों को आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग करने से उत्पादन में भी वृद्धि होगी।

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हरियाणा कृषि अनुदान योजना के लिए पात्रता एवं आवश्यक दस्तावेज  

योजना में आवेदन करने वाले किसान हरियाणा के स्थायी निवासी होने चाहिए। आवेदन करने वाले किसान के पास कृषि योग्य भूमि होनी बहुत आवश्यक है। साथ ही, इसके लिए किसान भाइयों के पास पैन कार्ड, बैंक पासबुक, परिवार पहचान पत्र, शपथ पत्र, पटवारी रिपोर्ट, मोबाइल नंबर, ट्रैक्टर आरसी जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों का होना अनिवार्य है। 

हरियाणा कृषि यंत्र अनुदान योजना के तहत किन यंत्रो पर मिलेगी सब्सिड़ी 

हरियाणा कृषि यंत्र अनुदान योजना के अंतर्गत हरियाणा सरकार विभिन्न कृषि यंत्रो पर अनुदान देने का ऐलान किया है। इस योजना के तहत मिलने वाले यंत्रो की सूची में स्ट्रॉ बेलर, राइस ड्रायर, फर्टिलाइजर ब्रॉडकास्ट, लेजर लैंड लेवलर, ट्रैक्टर ड्रिवन स्प्रे, पैडी ट्रांसप्लांटर, है रेक, मोबाइल श्रेडर।, रोटावेटर, रीपर बाइंडर, ट्रैक्टर ड्राइविंग पाउडर वीडर आदि यंत्र सम्मिलित हैं। 

हरियाणा कृषि यंत्र अनुदान योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया  

इस योजना का लाभ लेने के लिए पात्र किसानों को आवेदन करना होगा, हरियाणा कृषि यंत्र अनुदान योजना में आवेदन करने के लिए सबसे पहले आपको आधिकारिक वेबसाइट agriharyana.gov.in पर जाना होगा। इसके बाद आपके सामने होम पेज खुलेगा,होम पेज पर आपको Farmers Corner वाले ऑप्शन पर क्लिक करके Apply For Agriculture Schemes के ऑप्शन पर क्लिक कर देना है। 

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इसके बाद आपके सामने एग्रीकल्चर की सभी स्कीम्स जाएगी। इसमें आपको हरियाणा कृषि यंत्र सब्सिडी योजना पर क्लिक कर देना है। जैसे ही आप अपनी स्कीम के सामने View वाले का ऑप्शन पर क्लिक करेंगे आपके सामने एक नया पेज खुलेगा। इसमें आपको हेयर टू Register के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा। अब आपको पूछी गई जानकारी भरनी है।  अब आवश्यक दस्तावेजों को अपलोड करना होगा। हरियाणा कृषि यंत्र अनुदान योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए आपको फॉर्म सबमिट करना होगा ,पूरी जानकारी सही-सही देना होगा। इस प्रक्रिया को को पूरा करने के बाद आपका आवेदन हो संपन्न हो जाऐगा। 
ज्यादा पैदावार के लिए नहीं पड़ेगी यूरिया की जरूरत, बस इस चीज के लिए करना होगा आवेदन

ज्यादा पैदावार के लिए नहीं पड़ेगी यूरिया की जरूरत, बस इस चीज के लिए करना होगा आवेदन

खेती में किसी तरह के केमिकल का इस्तेमाल ना किया जाए, इसके लिए पूरे देश भर में जोर दिया जा रहा है. हालांकि केमिकल मुक्त खेती को बढ़ावा देने में सरकार भी पीछे नहीं हट रही है. जहां अब किसानों को खेती के लिए अब यूरिया की जरूरत नहीं पड़ेगी. क्योंकि उन्हें सरकार की तरफ से यूरिया से डबल शक्तिशाली हरी खाद ढेंचा की खेती के लिए लगभग 80 फीसद तक सब्सिडी, यानि की आसान शब्दों में समझा जाए तो 720 रुपये प्रति एकड़ के किसाब से अनुदान दिया जा रहा है. आजकल मिट्टी अपनी उपजाऊ क्षमता को खोटी जा रही है, वजह उर्वरकों का अंधाधुन इस्तेमाल करना है. जिसके बाद मिट्टी की खोई हुई उपजाऊ क्षमता को वापस लौटाने के लिए जैविक और नेचुरल खेती की तरफ रुख करने को बढ़ावा दिया जा रहा है. ताकि जमीन को रसायनों से होने वाले गंभीर और खतरनाक नुकसान से बचाया जा सके. इसके अलावा लोगों  को स्वस्थ्य कृषि उत्पाद भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं. जैविक और रासायनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारें भी अब आगे आ चुकी हैं. और अपने अपने स्तर से किसानों की हर संभव मदद कर रही हैं.

हरियाणा के किसानों के लिए चलाई खास योजना

हरियाणा सरकार राज्य में किसानों को नेचुरल खेती करने के लिए बढ़ावा दे रही है. जिसके लिये कई योजनाओं की भी शुरुआत की गयी है. जिसमें से एक है, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन एंव फसल विविधिकरण योजना. इस योजना के तहत खरी खाद की की खेती के लिए किसानों को 80 फीसद तक सब्सिडी यानि की 720 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से अनुदान दिया जा रहा है. 

हरी खाद की खेती है बेस्ट इको फ्रेंडली ऑप्शन

एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर किसान हरी खास सनई ढेंचा को चुनते हैं, तो उन्हें यूरिया की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी. हरी खाद की कई खासियत हैं, जिनमें एक ये है कि यह बेहद शक्तिशाली खाद है, और यह बेस्ट इको फ्रेंडली ऑप्शन है. खेतों में यूरिया का ज्यादा इस्तेमाल मिट्टी की सेहत बुरी तरह से बिगाड़ सकती है, वहीं हरी खाद से खेत को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा. बताया जा रहा है कि हरी खास वातावरण में नाइट्रोजन के स्थिरीकरण में सहायक है, और मिट्टी में जिवांशों की संख्या भी बढ़ाती है. इससे भूजल का लेवल भी काफी अच्छा होता है. जिस वजह से सरकार इसकी खेती पर भारी भरकम सब्सिडी दे रही है. 

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हरियाणा सरकार 10 एकड़ पर दे रही अनुदान

हरियाणा सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. जिसके अनुसार राज्य के किसानों को हरी खाद की खेती के लिए प्रति एकड़ 720 रुपये का अनुदान देगी. इसके अलावा किसान भाई अपने 10 एकड़ तक की यानी की 72 सौ रुपये तक अनुदान ले सकते हैं. इतना ही नहीं हरियाणा सरकार ने खेती में लगने वाले लागत को कम करते हुए 80 फीसद खर्च कुछ उठाने का फैसला किया है. यानि की किसानों को सिर्फ 20 फीसद सब्सिडी पर ढेंचा के बीच क्रिदने होंगे.

हरी खाद उगाना क्यों है जरूरी?

एक्सपर्ट्स की मानें तो, ढेंचा और सनई जैसी हरी खाद मिट्टी के लिए काफी अच्छी होती है. क्योंकि यह खुद ब खुद गलकर अपने आप खाद बन जाती है. गर्मियों के मौसम और तपती धूप में हरी खाद खूब पनपती है. किसान इसकी कटाई के बाद उसी खेत में अन्य फसलों की खेती बड़े ही आराम से कर सकते हैं. हरी खाद का काम मिट्टी में उत्पादन की क्षमता को बढ़ाना है. 

इस तरह करें आवेदन, मिलेगा योजना का लाभ

  • हरियाणा के किसान ढेंचा के बीजों को अनुदान पर पा सकते हैं.
  • आपको आवेदन करने के लिए मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल या फिर इसकी आधिकारिक वेबसाइट agruharayana.gov.in पर विजिट करना होगा.
  • इस वेबसाइट पर 4 अप्रैल 2023 ऑनलाइन आवेदन करने की सुविधा आपको मिल जाएगी.
  • ऑनलाइन आवेदन देने के बाद रजिस्ट्रेशन स्लिप, आदार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेजों की कॉपी हरियाणा बीज विकास निगम के बिक्री केंद्र पर जमा करना होगा.
  • यहां पर किसान भाई 20 फीसद राशि का भुगतान करने के बाद अनुदान पर हरी खाद का बीज ले सकते हैं.